Educational Program for Visually Impaired children
Educational Program for Visually Impaired
Educational Medium : साधारण किताब का प्रिंट 10 या 12 font का होता है पर कम दृष्टि वाले बालकों के लिए किताब है 18 से 24 font के बीच होना चाहिए प्रिंट साफ व खुला होना चाहिए मानचित्र व चित्रों का प्रयोग करना चाहिए।
Use Magnifying Glass : आंशिक रूप से अंधे बालकों के लिए मैग्नीफाइंग गिलास का यूज भी किया जा सकता है साधारण प्रिंट की किताबें का प्रिंट बड़ा नजर आता है तथा बच्चे इसको आसानी से पढ़ सकते हैं।
Closed Circuit TV : तकनीक में आई क्रांति के कारण आजकल आंशिक रूप से अंधे बच्चों को इसके द्वारा शिक्षा दी जा रही है कैमरे को सेट करके सामान्य किताबों पर लिखा मटेरियल वह चित्र आदि को स्क्रीन पर बड़ा करके दिखाया जाता है। आवश्यकतानुसार प्रिंट को छोटा या बड़ा किया जा सकता है
रोशनी: कम देखने वाले बालकों के लिए प्राकृतिक व कृतिम दोनों प्रकार की रोशनी का अधिक महत्व है। ऐसे बालकों के लिए कक्षा कक्ष रोशनी युक्त होना चाहिए। कक्षा की दीवारें हल्के रंग की होनी चाहिए तथा छत सफेद रंग की। शीशे के ब्लैक बोर्ड का प्रयोग करना चाहिए।
फर्नीचर : हल्के रंग का फर्नीचर कक्षा में इस प्रकार रखा होना चाहिए ताकि बाहर निकलने में परेशानी ना हो। कक्षा के दरवाजों का माप ऐसा होना चाहिए कि फर्नीचर आसानी से बाहर या अंदर रखा जा सके।
विशेष शिक्षक : ऐसे बालकों के लिए विशेष प्रकार से प्रशिक्षित शिक्षक का प्रबंध करना चाहिए उसे आंखों की बनावट सफाई आंख की सामान्य बीमारी तथा बालकों को होने वाली सामान्य कठिनाइयों से परिचित होना चाहिए। उसे ऐसे बालकों की शैक्षिक मनोवैज्ञानिक व संवेगात्मक कठिनाइयों का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए ताकि वह बालकों की इन कठिनाइयों को दूर कर सके। उसे बालकों में ऐसी क्षमता उत्पन्न करने का प्रयास करना चाहिए की वह अपनी शारीरिक कमजोरी के विचार मन में ना लाए। अध्यापक को समय समय पर बालक के माता-पिता से विचार विमर्श करते रहना चाहिए ताकि बालक के बारे में नवीन जानकारी प्राप्त कर सके।
Motivation: दृष्टि दोष बाले बालकों को प्रेरणा देने वाले प्रकरण सुनाने चाहिए ताकि वे जीवन में आशावादी दृष्टिकोण अपनाएं तथा उनके मन में हीन भावना न पनप सके। वह प्रेरणा पाकर जीवन में आगे बढ़े तथा आत्मनिर्भर होकर सम्मान पूर्वक जीवन जी सकें।
Physically Checkup : समय-समय पर इन बालकों का शारीरिक निरीक्षण करवाना चाहिए आंख से संबंधित सामान्य बीमारियों तथा शारीरिक बीमारियों का इलाज करवाना चाहिए।
Educational Observation : विद्यालय का यह कर्तव्य बनता है कि दृष्टि दोष वाले बालकों की शैक्षिक प्रगति का ध्यान रखें यदि उनको किसी प्रकार की शैक्षिक शिकायत हो तो उसे तुरंत दूर करना चाहिए। माता पिता को भी समय-समय पर कक्षा के अध्यापक से मिलते रहे और कोई कमी हो तो उसे दूर करना चाहिए।
Co-curricular Activities : स्कूल में इन बालकों को सहगामी क्रियाओं में भाग लेने के लिए अवसर प्रदान करने चाहिए। दृष्टि दोष श्रेणी के अनुसार उनको सहगामी क्रियाओं में भाग लेने देना चाहिए। जैसे कविता रचना, गाना गाना, भाषण प्रतियोगिता तथा दूसरी खेल जो आवाज पर आधारित हो।
Special Method : यह बच्चे अपने ज्ञानेंद्रियों पर ही निर्भर होते हैं इसलिए उनको विशेष ढंग से पढ़ाना चाहिए। अध्यापक को उनकी छूने , सुनने तथा बोलने की क्षमता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ताकि वे अपनी ज्ञानेंद्रियों का अधिक से अधिक प्रयोग कर सके।
Special Equipment : इन बच्चों के लिए विशेष सामग्री का प्रबंध होना चाहिए बोलने वाली किताबों का प्रयोग करना चाहिए ब्रेल लिपि के द्वारा यह बालक पढ व लिख सकते हैं ।
Tape Recorder : किताबों में किसी मटेरियल को पढ़कर रिकॉर्ड कर लिया जाता है और फिर दृष्टि दोष बच्चों को सुनाया जा सकता है इसके प्रयोग से हम वी आई बच्चों को विज्ञान तथा भूगोल आदि का शिक्षण प्रदान कर सकते हैं।
Very useful information
ReplyDelete