Concept and Definition of Disease, Impairment, Disability and Handicap:
क्षति कोई भी असमानता जो शारीरिक व मानसिक स्तर की होती है क्षति कहलाती हैं। छति में प्राणी की क्षमता को प्रभावित किए बिना उसकी संरचना एवं कार्य प्रणाली प्रभावित होती है।
उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति का रेटिना क्षतिग्रस्त होता है तो वह दृष्टि अक्षम हो जाता है इस प्रकार मस्तिष्क के धीमे-धीमे कार्य को बौद्धिक क्षति कहा जा सकता है
ICIDH के अनुसार किसी भी प्रकार की मानसिक शारीरिक मनोशारीरिकका असमानता अथवा कमी जो अंगीय कारणों से होती है उसे क्षति कहते हैं
WHO के अनुसार क्षति शारीरिक संरचना मनोशारीरिक तथा शारीरिक क्रियाओं की कमी या असमानता होती है।
कोशिकाओं के समूह को उत्तक (tissue) कहते हैं।
अक्षमता क्षति के परिणाम स्वरूप सामान्य व्यक्ति की तरह क्रियाकलापों को करने में बांधा या रुकावट को अक्षमता कहते हैं। जो कि सामान्य तौर पर अपेक्षित है अक्षमता से प्रभावित व्यक्ति हेतु निर्धारण भूमिका परिपेक्ष में आती है। अक्षमता से प्रभावित व्यक्ति जिसकी क्रिया सीमित हैं जन्मजात रूप से अक्षम नहीं होते हैं बल्कि वे व्यक्तिगत एवं सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने में अक्षम होते हैं अक्षमता वह स्थिति है जब क्षति के कारण व्यक्ति में सामान्य क्रियाकलाप न कर पाने में प्रतिबंध या रुकावट पैदा करती है
उदाहरण के लिए मस्तिष्क का ब्रोकास क्षेत्र एवं गले से संबंधित क्षेत्र क्षतिग्रस्त होने से बोलने में अक्षमता।
अक्षमता (Disability) ICIDH के अनुसार अक्षमता को कुछ इस तरह परिभाषित किया गया है जब किसी कार्य करने के तरीके में सामान्य व्यक्ति जैसी क्रिया नहीं दिखती अर्थात कार्य करने में बाधा या रुकावट पहुंचती है तो उसे अक्षमता कहते हैं ।
WHO के अनुसार अक्षमता मनोवैज्ञानिक संवेगात्मक या शरीर के किसी अंग की क्षति होती है । क्षति के फल स्वरुप होने वाली कोई भी समस्या जो हमारे काम करने में बांधा डालती है उसे अक्षमता कहते हैं।
दिव्यांगता उस दशा को कह सकते हैं जो क्षति एवं अक्षमता के कारणों से उत्पन्न होती है।जिससे शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं संबंधी भूमिकाओं को वह सामान्य व्यक्तियों की तुलना में नहीं निभा पाता तथा यह व्यक्ति को आयु लिंग व सामाजिक स्तर के अनुरूप कार्य करने में बांधा पहुंचाती है
उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति का दुर्घटनावश हाथ जल गया उसकी कोशिकाएं एवं उत्तक जलने से क्षतिग्रस्त हो गए हाथ जलने के कारण वह अपना कार्य नहीं कर पा रहा है तो यह अक्षमता की स्थिति है और जब यह स्थिति स्थायी रूप धारण कर लेगी अर्थात हाथ में कुछ कमी रह जाना जो पहले जैसी ना हो सके दिव्यांगता कहलाती है।
दिव्यांगता handicapped ICIDH के अनुसार व्यक्ति के लिए असुविधा है जो क्षति या निशक्तता के फलस्वरूप उत्पन्न होती। जिसमें व्यक्ति की सामान्य भूमिका के निर्वाह में रुकावट पैदा करती हैं। दिव्यांगता सामाजिक निशक्तता का परिणाम कही जा सकती है।
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